सरकार ने सोना-चांदी पर इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाई, 6% से 15% हुई

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नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने सोना और चांदी पर इम्पोर्ट ड्यूटी में बड़ा बदलाव करते हुए इसे 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है। सरकार के इस फैसले का मुख्य उद्देश्य बढ़ते व्यापार घाटे को नियंत्रित करना और गिरते रुपए को सहारा देना बताया जा रहा है।

भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना आयातक देशों में शामिल है। देश में सोने की मांग का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा किया जाता है, जिसके लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर में भुगतान करना पड़ता है। इससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ता है और व्यापार घाटा भी बढ़ता है।

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ने के बाद सोना और चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। इससे घरेलू बाजार में मांग प्रभावित होने की संभावना है। सरकार का अनुमान है कि ऊंची ड्यूटी के कारण आयात कम होगा, जिससे डॉलर की बचत होगी और रुपए की स्थिति में सुधार आ सकता है।

हालांकि, इस फैसले का असर ज्वेलरी कारोबार पर भी देखने को मिल सकता है। सर्राफा व्यापारियों के अनुसार कीमतें बढ़ने से ग्राहकों की खरीदारी प्रभावित हो सकती है, खासकर शादी और त्योहारों के सीजन में।

विशेषज्ञों ने यह भी आशंका जताई है कि इम्पोर्ट ड्यूटी अधिक होने पर सोने की तस्करी बढ़ सकती है। भारत में पहले भी ऊंची ड्यूटी के दौरान गोल्ड स्मगलिंग के मामले सामने आ चुके हैं।

सरकार के इस कदम को अल्पकालिक आर्थिक सुरक्षा रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बढ़ी हुई ड्यूटी का असर सोने के आयात, व्यापार घाटे और रुपए की स्थिति पर कितना पड़ता है।

सोना-चांदी पर सरकार का बड़ा फैसला:  व्यापार घाटा कम करने की कोशिश

आर्थिक जानकारों के अनुसार भारत पहले से ही कच्चे तेल और अन्य आवश्यक वस्तुओं के आयात पर निर्भर है। ऐसे में जब सोने का आयात बढ़ता है तो व्यापार घाटा और करंट अकाउंट डेफिसिट पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। सरकार ने इसी दबाव को कम करने के लिए सोना-चांदी पर इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाने का निर्णय लिया है।

आम जनता और बाजार पर असर

इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ने के बाद घरेलू बाजार में सोना और चांदी की कीमतों में तेजी आने की संभावना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि:

  • ज्वेलरी खरीदना महंगा हो जाएगा
  • शादी और त्योहारों के सीजन में मांग प्रभावित हो सकती है
  • सर्राफा कारोबार पर दबाव बढ़ सकता है

सर्राफा बाजार के कारोबारियों का कहना है कि कीमतें बढ़ने से ग्राहक खरीदारी को टाल सकते हैं या हल्के वजन के आभूषणों की ओर रुख कर सकते हैं।

सरकार को क्या फायदा?

सरकार को उम्मीद है कि ड्यूटी बढ़ने से:

  • सोने और चांदी का आयात घटेगा
  • डॉलर की बचत होगी
  • विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम होगा
  • रुपए की गिरावट को कुछ हद तक रोका जा सकेगा

भारत में जब भी डॉलर की मांग बढ़ती है, रुपए पर दबाव आता है। सोना आयात कम होने से डॉलर आउटफ्लो घट सकता है।

तस्करी बढ़ने का खतरा

आर्थिक विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि सोने पर अधिक टैक्स से तस्करी बढ़ सकती है। भारत में पहले भी ऊंची इम्पोर्ट ड्यूटी के दौरान अवैध गोल्ड स्मगलिंग के कई मामले सामने आए हैं।

अगर घरेलू बाजार और अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बड़ा अंतर बनता है, तो अवैध रास्तों से सोना लाने की घटनाएं बढ़ सकती हैं।

भारत की अर्थव्यवस्था के लिए क्या संकेत?

सरकार का यह कदम एक अल्पकालिक आर्थिक सुरक्षा रणनीति माना जा रहा है।
हालांकि इससे सोने की मांग पर कुछ असर पड़ सकता है, लेकिन भारतीय बाजार में सोने की सांस्कृतिक और निवेश मांग को देखते हुए इसका दीर्घकालिक प्रभाव देखना बाकी है।

अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या सरकार का यह फैसला व्यापार घाटा कम करने और रुपए को स्थिर रखने में सफल होगा या नहीं।

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MOTI SINGH RATHORE
Author: MOTI SINGH RATHORE

EDITOR IN CHIEF "MOKAJI TV"

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