परिस्थिति का विवरण
Donald Trump प्रशासन ने 19 सितंबर 2025 को जारी घोषणा में कहा कि नए कार्य-वीज़ा श्रेणी H‑1B visa के लिए प्रारंभिक आवेदन पर 1 लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग ₹83 लाख) का शुल्क लगेगा।
इसका उद्देश्य अमेरिका में उच्च-कुशल विदेशी श्रमिकों की प्रवेश प्रक्रिया को कठोर बनाना बताया गया है।
हालाँकि, अब अमेरिकी कांग्रेस के एक समूह ने इस नीति को तत्काल पुनर्विचार करने का आग्रह किया है।
???? कांग्रेस की चिट्ठी में क्या कहा गया है?
- Jimmy Panetta, Ami Bera, Salud Carbajal तथा Julie Johnson ने राष्ट्रपति को लिखे पत्र में कहा है कि H-1B प्रोग्राम सिर्फ रोजगार नहीं बल्कि अमेरिका की नवप्रवर्तन (innovation) पद्धति, राष्ट्रीय सुरक्षा तथा रणनीतिक साझेदारी का अंग है।
- प्रमुख बिंदु:
- “अगर अमेरिका वैश्विक प्रतिभा को नहीं आकर्षित कर पाएगा, तो चीन जैसे देश तेजी से आगे बढ़ेंगे।”
- भारत जैसे देश से आने वाले वीजा धारक अमेरिका के लिए महत्वपूर्ण हैं — क्योंकि FY2024 में H-1B धारकों में 71 % से अधिक भारतीय थे।
- उन्होंने आग्रह किया कि इस प्रक्रिया को कम करें बजाय इसे बंद करने के।
???? क्या है इस नीति के प्रमुख पहलू?
- नए आवेदनों पर $100,000 प्रारंभिक शुल्क लगना तय किया गया है।
- वर्तमान H-1B धारकों या उनकी नवीनीकरण (extensions) पर यह शुल्क लागू नहीं होगा।
- इस कदम के पीछे मुख्य तर्क: अमेरिकी श्रमिकों को प्राथमिकता देना तथा वीजा-प्रणाली के दुरुपयोग को रोकना।
- आलोचकों का कहना है कि यह विशेष रूप से स्टार्ट-अप, शोध एवं नव-उद्यम (innovation-led ventures) को नुकसान पहुँचाएगा।
???? भारत-अमेरिका सम्बन्धों पर प्रभाव
- इस नीति का सीधा असर भारत को जाता है क्योंकि भारतीय प्रोफेशनल्स H-1B धारकों का प्रमुख हिस्सा हैं।
- अमेरिका-भारत के तकनीकी, शोध एवं व्यावसायिक क्षेत्रों में सहयोग को यह कदम बाधित कर सकता है।
- भारतीय प्रतिभा जब उपयुक्त अवसर न पाए, तो अन्य देशों (कनाडा, जर्मनी, चीन) की ओर रुख कर सकती है — जो अमेरिका के लिए प्रतिस्पर्धात्मक नुकसान हो सकता है।
???? क्या-क्या चुनौतियाँ सामने हैं?
- स्टार्ट-अप और छोटे उद्यमों के पास इतने बड़े शुल्क की व्यवस्था नहीं होगी — इसके कारण वे प्रतिभा को भर्ती/रख नहीं पाएंगे।
- अमेरिका की नेतृत्व स्थिति (विशेषकर AI, रोबोटिक्स, टेक्नोलॉजी में) कमजोर हो सकती है अगर वैश्विक प्रतिभा भारत/चीन जैसी जगहों की ओर जाये।
- नीति-अनिश्चितता और पुनरावलोकन की मांग से कंपनियों, संभावित कर्मचारियों दोनों में भ्रम की स्थिति बनी है।
✅ क्या होना चाहिए? (कांग्रेस का प्रस्ताव)
- नीति ऐसे हो कि अमेरिका वैश्विक प्रतिभा को बनाए रख सके — न कि उन्हें बाहर निकलने को मजबूर करे।
- शुल्क को बहुत कम रखा जाना चाहिए ताकि नव-उद्यम और स्टार्ट-अप प्रतिभा को प्रतिस्पर्धा में रख सकें।
- वीजा प्रणाली में सुधार हो सकता है — जैसे पारदर्शिता, वेतनमान नियंत्रण, बेरोजगारी स्थिति में उपयोगकर्ता-प्रोटेक्शन — लेकिन इससे प्रतिभा-आगमन बंद न हो।
???? निष्कर्ष
यह बदलाव सिर्फ वीजा-प्रकार नहीं बल्कि अमेरिका की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता, तकनीकी नेतृत्व और भारत-संबंधित रणनीति से जुड़ा मामला बन गया है। अगर अमेरिका ने इस पहलू को नजरंदाज़ किया तो न सिर्फ तकनीकी प्रतिभा वहाँ से पलायन कर सकती है बल्कि अमेरिका-भारत के लंबे-समय के संबंधों पर भी असर पड़ सकता है।
Author: MOKAJI TV
I am Moti Singh Rathore Founder/CEO DIRECTOR/ Editor in chief of Mokaji Media Entertainment Pvt Ltd Company. Our Media Company run Media business with online News Portal "MOKAJI TV".









