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मृतक के शव के साथ प्रदर्शन किया तो होगी 5 साल तक की जेल — राजस्थान में पहली बार लागू हुआ कानून
Jaipur | Special Report by MOKAJI TV
राजस्थान सरकार ने राज्य में पहली बार ऐसा कानून लागू कर दिया है, जिसके तहत किसी मृतक के शव का राजनीतिक या सामाजिक विरोध-प्रदर्शन में उपयोग करना अब दंडनीय अपराध होगा। सरकार ने इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है, और इसके साथ ही यह कानून पूरे राजस्थान में प्रभावी हो गया है।
कानून का उद्देश्य क्या है?
पिछले कुछ वर्षों में यह देखा गया कि विभिन्न संगठन या परिजन किसी मृतक के शव को सड़क, चौराहे या सरकारी भवन के बाहर रखकर प्रदर्शन करते थे, जिससे:
- कानून-व्यवस्था बिगड़ती थी
- ट्रैफिक बाधित होता था
- हिंसक भीड़ की संभावना बढ़ जाती थी
- शव का अनादर होता था
- पोस्टमॉर्टम और अंतिम संस्कार में देरी से स्वास्थ्य जोखिम बढ़ता था
इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने ‘शव प्रदर्शन निषेध अधिनियम’ लागू किया है।
कानून में क्या-क्या प्रावधान हैं?
✔ मृतक के शव का राजनीतिक विरोध या सार्वजनिक प्रदर्शन – अब अपराध
कानून के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति या समूह:
- शव को सड़कों, सरकारी भवनों, चौक-चौराहों पर रखकर प्रदर्शन करता है
- राजनीतिक उद्देश्य से शव का उपयोग करता है
- मांगों को मनवाने के लिए शव का दुरुपयोग करता है
तो उसके खिलाफ सीधे दंडात्मक कार्रवाई होगी।
सजा क्या मिलेगी?
6 माह से 5 वर्ष तक की सजा
और
जुर्माना (राशि कोर्ट तय करेगा)
स्थिति गंभीर होने पर सजा और अधिक कठोर भी हो सकती है।
कौन-कौन आएगा कानून के दायरे में?
- मृतक के परिजन
- कोई भी संगठन, यूनियन या समूह
- राजनीतिक दल या उनके कार्यकर्ता
- भीड़ को उकसाने वाले लोग
- सोशल मीडिया पर ऐसी गतिविधि को बढ़ावा देने वाले लोग भी जांच में आ सकते हैं
कानून से क्या बदलेगा?
✔ सड़क जाम, हिंसा और सार्वजनिक व्यवस्था भंग रोकने में मदद
✔ पुलिस और प्रशासन को स्पष्ट अधिकार
✔ चिकित्सा व फॉरेंसिक कार्य में देरी नहीं
✔ मृतक की गरिमा की रक्षा
✔ परिवार को समय पर अंतिम संस्कार की सुविधा
पुलिस को क्या अधिकार दिए गए?
कानून के लागू होने के बाद पुलिस:
- किसी भी ऐसे प्रदर्शन को तुरंत रोक सकेगी
- शव को सुरक्षित स्थान पर ले जा सकेगी
- प्रदर्शन आयोजित करने वालों को गिरफ्तार कर सकेगी
- धारा 151/107/116 के साथ नई धारा भी लागू कर सकेगी
पुलिस के लिए यह पहली बार कानूनी रूप से “शव-आधारित विरोध” को खत्म करने का मजबूत आधार है।
राजस्थान में पहली बार लागू क्यों किया गया?
पिछले 10–12 वर्षों में राजस्थान में:
- कई बार शव रखकर दिनभर चलने वाले विरोध
- सड़क जाम
- ट्रेनों को रोका जाना
- हिंसक भीड़
- राजनीतिक दलों द्वारा इस स्थिति का लाभ उठाना
जैसी घटनाएँ बढ़ने लगी थीं।
इनकी वजह से सरकार को नया कानून अनिवार्य लगने लगा।
कानून पर विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है:
यह कानून संवैधानिक रूप से सही है क्योंकि यह “लोक व्यवस्था” और “सार्वजनिक सुरक्षा” के अधीन आता है।
मानवाधिकार विशेषज्ञों की राय:
शव का उपयोग विरोध में करना मृतक की गरिमा का उल्लंघन है, इसलिए यह कदम सकारात्मक है।
Author: MOTI SINGH RATHORE
EDITOR IN CHIEF "MOKAJI TV"









