नई दिल्ली | MOKAJI TV NEWS एडिटर इन चीफ: मोती सिंह राठौड़ की विशेष रिपोर्ट
जब पूरा देश नए साल 2026 में प्रवेश कर चुका है, तब जश्न की चमक-दमक के बीच एक कड़वी सच्चाई भी सामने आ रही है। देश के कई शहरों में नए साल का स्वागत नशा, शराब, ड्रग्स, तेज़ संगीत और देर रात तक चलने वाली पार्टियों के साथ किया गया। यह दृश्य केवल उत्सव का नहीं, बल्कि भारत के भविष्य को लेकर एक गंभीर चेतावनी भी है।
देश का युवा वर्ग, जिसे राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी ताकत माना जाता है, आज गंभीर चिंतन, सामाजिक जिम्मेदारी और अनुशासन से दूर होता दिखाई दे रहा है। यही कारण है कि 2026 के आगमन के साथ यह सवाल और भी प्रासंगिक हो गया है—
क्या नशे और अय्याशी में डूबा युवा भारत के भविष्य को सुरक्षित रख पाएगा?
गंभीरता और युवा
🎯 मौज-मस्ती की संस्कृति और गिरती गंभीरता
विशेषज्ञों का मानना है कि मौज-मस्ती और मनोरंजन गलत नहीं है, लेकिन जब यही जीवन का उद्देश्य बन जाए, तब समस्या पैदा होती है। आज का एक बड़ा युवा वर्ग पढ़ाई, कौशल विकास और समाज के प्रति दायित्व की जगह केवल तात्कालिक आनंद को प्राथमिकता देता नजर आ रहा है।
सोशल मीडिया, वेब-सीरीज़ और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नशे और अय्याशी को जिस तरह सामान्य और ग्लैमरस दिखाया जा रहा है, उसने युवाओं की सोच पर गहरा असर डाला है। नतीजा यह है कि नशा अब बुराई नहीं, बल्कि “स्टेटस सिंबल” बनता जा रहा है।
केवल व्यक्तिगत नहीं, राष्ट्रीय संकट नशा!
🚨 नशा: केवल व्यक्तिगत नहीं, राष्ट्रीय संकट
नशा केवल एक व्यक्ति की सेहत खराब नहीं करता, बल्कि पूरे समाज को कमजोर करता है।
मानसिक स्वास्थ्य समस्याएँ बढ़ रही हैं
सड़क दुर्घटनाओं में इज़ाफा हो रहा है
अपराध और हिंसा की घटनाएँ सामने आ रही हैं
युवा अवसाद और दिशाहीनता का शिकार हो रहे हैं
विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि यदि यही प्रवृत्ति जारी रही, तो आने वाले वर्षों में देश को एक गंभीर सामाजिक और आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है।
युवा और राष्ट्र का भविष्य
🇮🇳 युवा और राष्ट्र का भविष्य
भारत दुनिया का सबसे युवा देश है। यह तथ्य गर्व का विषय है, लेकिन साथ ही बड़ी जिम्मेदारी भी है। युवा केवल जनसंख्या का आंकड़ा नहीं, बल्कि नीति, नेतृत्व और नवाचार की आधारशिला होता है।
यदि युवा नशे, लापरवाही और गैर-जिम्मेदार जीवनशैली में फंसा रहेगा, तो:
लोकतंत्र कमजोर होगा
उत्पादकता घटेगी
देश की वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर असर पड़ेगा
2026 का असली स्वागत तब होगा, जब युवा खुद से पूछे—मैं अपने देश के लिए क्या कर रहा हूँ?
केवल युवा नहीं, पूरा समाज जिम्मेदार
👨👩👧👦 केवल युवा नहीं, पूरा समाज जिम्मेदार
विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि इस स्थिति के लिए केवल युवा को दोषी ठहराना उचित नहीं है।
इसके पीछे कई कारण हैं:
परिवारों में संवाद की कमी
शिक्षा प्रणाली में मूल्यों का अभाव
समाज में गलत आदर्शों का महिमामंडन
नीतियों और निगरानी की कमजोर व्यवस्था
जब समाज दिशा नहीं देता, तो युवा भटकता है।
🛑 समाधान क्या है?
समस्या का हल रोक-टोक नहीं, बल्कि सही मार्गदर्शन है।
नशे के खिलाफ सख्त कानून और जागरूकता
खेल, स्टार्टअप, कौशल और सेवा के अवसर
स्कूल-कॉलेजों में नैतिक शिक्षा और काउंसलिंग
सोशल मीडिया पर जिम्मेदार कंटेंट को बढ़ावा
✍️ एक जागरूक नागरिक की चिंता
2026 केवल एक नया साल नहीं है, बल्कि एक चेतावनी है।
यदि आज का युवा नहीं संभला, तो कल भारत को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।
नया साल केवल जश्न का नहीं,
नए संकल्प, नई जिम्मेदारी और नई सोच का होना चाहिए।
भारत का भविष्य आज के युवा के हाथ में है—
अब फैसला उसे करना है कि वह इतिहास बनेगा या चेतावनी।

Author: MOKAJI TV
I am Moti Singh Rathore Founder/CEO DIRECTOR/ Editor in chief of Mokaji Media Entertainment Pvt Ltd Company. Our Media Company run Media business with online News Portal "MOKAJI TV".








