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अमेरिका के टैरिफ और वीज़ा पॉलिसी पर बढ़ती सख्ती, दुनिया में नाराज़गी
वॉशिंगटन / नई दिल्ली:
अमेरिका की टैरिफ और वीज़ा पॉलिसी को लेकर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठने लगे हैं। कई देशों ने आरोप लगाया है कि अमेरिका अपने आर्थिक और राजनीतिक दबदबे का इस्तेमाल करते हुए टैरिफ और वीज़ा नियमों को “तानाशाही अंदाज़” में लागू कर रहा है, जिससे विकासशील देशों के व्यापार, निवेश और मानव संसाधन पर सीधा असर पड़ रहा है।
टैरिफ से वैश्विक व्यापार प्रभावित
अमेरिका द्वारा आयातित वस्तुओं पर लगाए गए ऊँचे टैरिफ से कई देशों के निर्यातकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। स्टील, एल्यूमिनियम, टेक्नोलॉजी और कृषि उत्पादों पर शुल्क बढ़ने से वैश्विक सप्लाई चेन बाधित हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह नीति मुक्त व्यापार की भावना के खिलाफ है और इससे महंगाई बढ़ने की आशंका भी है।
वीज़ा पॉलिसी में सख्ती
वर्क वीज़ा, स्टूडेंट वीज़ा और इमिग्रेशन नियमों को लेकर अमेरिका की सख्त नीति पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। बड़ी संख्या में वीज़ा आवेदन खारिज होने से आईटी प्रोफेशनल्स, छात्रों और शोधकर्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई कंपनियों का मानना है कि इससे अमेरिका की अपनी अर्थव्यवस्था और इनोवेशन सेक्टर को भी नुकसान हो सकता है।
भारत समेत कई देशों की चिंता
भारत सहित कई देशों ने कूटनीतिक स्तर पर अपनी आपत्तियाँ दर्ज कराई हैं। व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह रुख जारी रहा तो जवाबी टैरिफ और नीतिगत टकराव बढ़ सकता है, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
आगे क्या?
विश्लेषकों के मुताबिक, अमेरिका को टैरिफ और वीज़ा पॉलिसी में संतुलन बनाना होगा, ताकि वैश्विक सहयोग बना रहे। वहीं, प्रभावित देशों के सामने भी अपने हितों की रक्षा के लिए कूटनीतिक और आर्थिक रणनीति मजबूत करने की चुनौती है।
Author: MOKAJI TV
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